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bhagavat 9.8.29: इसके बाद, अंशुमान ने कपिल मुनि की परिक्रमा की और सिर झुकाकर उन्हें सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। इस प्रकार उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करके, अंशुमान यज्ञ-पशु को वापस ले आया और महाराज सगर ने इस घोड़े के साथ यज्ञ का शेष अनुष्ठान पूरा किया।   |   bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  9.8.29 
तं परिक्रम्य शिरसा प्रसाद्य हयमानयत् ।
सगरस्तेन पशुना यज्ञशेषं समापयत् ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, अंशुमान ने कपिल मुनि की परिक्रमा की और सिर झुकाकर उन्हें सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। इस प्रकार उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करके, अंशुमान यज्ञ-पशु को वापस ले आया और महाराज सगर ने इस घोड़े के साथ यज्ञ का शेष अनुष्ठान पूरा किया।
 
After that Anshuman circled around Kapil Muni and bowed his head to him with respect. Thus, after completely satisfying him, Anshuman brought back the sacrificial animal and Maharaja Sagar completed the remaining rituals of the yagya with this horse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)