अपवित्रः पवित्रो वा
सर्ववास्थांगतोंऽपि वा
योस्मरत् पुंडरीकाक्षं
स बाह्याभ्यंतरः शुचिः
बाह्य से अपने आप को शुद्ध रखने के लिए हमें दिन में तीन बार स्नान करना चाहिए और आंतरिक शुद्धता के लिए हमें हरे कृष्ण मंत्रोच्चारण से हृदय को शुद्ध करना चाहिए। कृष्ण भावनामृत संघ के सदस्यों को हमेशा इस सिद्धांत (बाह्याभ्यंतरः शुचिः) का पालन करना चाहिए। तब एक दिन परमेश्वर को आमने-सामने देख पाना संभव हो सकता है।
