Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.7.5-6: त्रिबन्धन का पुत्र सत्यव्रत था जिसे त्रिशंकु के नाम से जाना जाता है। विवाह के दौरान ब्राह्मण कन्या का अपहरण करने के कारण, उसके पिता ने उसे शाप दिया कि वह चांडाल बन जाएगा, जो शूद्र से भी नीच होता है। इसके बाद, विश्वामित्र के प्रभाव से, वह अपने भौतिक शरीर में स्वर्गलोक गया, लेकिन देवताओं के पराक्रम के कारण वह फिर से गिर गया। फिर भी, विश्वामित्र की शक्ति के कारण, वह बिल्कुल नीचे नहीं गिरा। आज भी उसे आकाश में सिर के बल लटका हुआ देखा जा सकता है। | bhagavat अध्याय 9.7: राजा मान्धाता के वंशज । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिबन्धन का पुत्र सत्यव्रत था जिसे त्रिशंकु के नाम से जाना जाता है। विवाह के दौरान ब्राह्मण कन्या का अपहरण करने के कारण, उसके पिता ने उसे शाप दिया कि वह चांडाल बन जाएगा, जो शूद्र से भी नीच होता है। इसके बाद, विश्वामित्र के प्रभाव से, वह अपने भौतिक शरीर में स्वर्गलोक गया, लेकिन देवताओं के पराक्रम के कारण वह फिर से गिर गया। फिर भी, विश्वामित्र की शक्ति के कारण, वह बिल्कुल नीचे नहीं गिरा। आज भी उसे आकाश में सिर के बल लटका हुआ देखा जा सकता है।
Tribandhan's son was Satyavrata who is famous by the name of Trishanku. Since he had kidnapped a Brahmin's daughter from the wedding altar, his father cursed him to become a Chandala who is lower than a Shudra. Thereafter, due to the influence of Vishwamitra, he went to heaven with his body, but due to the power of the gods, he fell down again. However, due to the power of Vishwamitra, he did not fall down completely. Even today, he can be seen hanging upside down in the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥