| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 7: राजा मान्धाता के वंशज » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 9.7.11  | निर्दशे च स आगत्य यजस्वेत्याह सोऽब्रवीत् ।
दन्ता: पशोर्यज्जायेरन्नथ मेध्यो भवेदिति ॥ ११ ॥ | | | | | | अनुवाद | | दस दिन बाद वरुण फिर आया और हरिश्चंद्र से बोला, "अब तुम यज्ञ कर सकते हो।" हरिश्चंद्र ने उत्तर दिया, "जब पशु का दांत निकलता है तभी वह बलि देने के योग्य शुद्ध होता है।" | | | | दस दिन बाद वरुण फिर आया और हरिश्चंद्र से बोला, "अब तुम यज्ञ कर सकते हो।" हरिश्चंद्र ने उत्तर दिया, "जब पशु का दांत निकलता है तभी वह बलि देने के योग्य शुद्ध होता है।" | | ✨ ai-generated | | |
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