Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.7.1: शुकदेव गोस्वामी बोले: मान्धाता के सबसे प्रमुख पुत्र वो थे जिन्हें अम्बरीष के नाम से जाना जाता है। अम्बरीष को उनके दादा युवनाश्व ने पुत्र के रूप में स्वीकार किया था। अम्बरीष के पुत्र यौवनाश्व हुए और यौवनाश्व के पुत्र हारीत हुए। मान्धाता की वंश में अम्बरीष, हारीत और यौवनाश्व अत्यंत प्रमुख थे।   |   bhagavat अध्याय 9.7: राजा मान्धाता के वंशज   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 7: राजा मान्धाता के वंशज  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.7.1 
श्रीशुक उवाच
मान्धातु: पुत्रप्रवरो योऽम्बरीष: प्रकीर्तित: ।
पितामहेन प्रवृतो यौवनाश्वस्तु तत्सुत: ।
हारीतस्तस्य पुत्रोऽभून्मान्धातृप्रवरा इमे ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी बोले: मान्धाता के सबसे प्रमुख पुत्र वो थे जिन्हें अम्बरीष के नाम से जाना जाता है। अम्बरीष को उनके दादा युवनाश्व ने पुत्र के रूप में स्वीकार किया था। अम्बरीष के पुत्र यौवनाश्व हुए और यौवनाश्व के पुत्र हारीत हुए। मान्धाता की वंश में अम्बरीष, हारीत और यौवनाश्व अत्यंत प्रमुख थे।
 
Shukadev Goswami said: The foremost son of Mandhata became famous by the name Ambarish. Ambarish was accepted as his son by his father Yuvanashva. Ambarish's son was Yauvanashwa and Yauvanashwa's son was Harit. Ambarish, Harit and Yauvanashwa were very prominent in the lineage of Mandhata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)