शेषं निवेदयामास पित्रे तेन च तद्गुरु: ।
चोदित: प्रोक्षणायाह दुष्टमेतदकर्मकम् ॥ ८ ॥
अनुवाद
विकुक्षि ने शेष मांस राजा इक्ष्वाकु को लाकर दे दिया जिन्होंने उसे शुद्ध करने के लिए वसिष्ठ को दे दिया। लेकिन वसिष्ठ यह तुरन्त समझ गये कि उस मांस का कुछ भाग विकुक्षि ने पहले ही खा लिया है; अतएव उन्होंने कहा कि यह मांस श्राद्ध के अनुकूल नहीं है और इससे श्राद्ध नहीं किया जा सकता।
Vikukshi brought the remaining meat to King Iksvaku, who gave it to Vasishtha to purify it. But Vasishtha immediately realized that Vikukshi had already consumed some part of the meat; therefore, he said that this meat was unsuitable for use in Shraddha.
तात्पर्य
जो चीज यज्ञ में चढ़ाने के लिए होती है उसे किसी के द्वारा भगवान को अर्पित किए जाने के पहले चखना नहीं चाहिए। हमारे मंदिरों में, यह नियम प्रभावी है। कोई भी भोजन रसोई से नहीं खा सकता जब तक कि वह भगवान को अर्पित न किया गया हो। यदि किसी चीज को भगवान को अर्पित किए जाने से पहले लिया जाता है, तो पूरी तैयारी दूषित हो जाती है और अब उसे चढ़ाया नहीं जा सकता है। देवता की पूजा में लगे लोगों को यह अच्छी तरह से पता होना चाहिए ताकि वे देवता पूजा में अपराध करने से बच सकें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥