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श्लोक 9.6.8  |
शेषं निवेदयामास पित्रे तेन च तद्गुरु: ।
चोदित: प्रोक्षणायाह दुष्टमेतदकर्मकम् ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| विकुक्षि ने शेष मांस राजा इक्ष्वाकु को लाकर दे दिया जिन्होंने उसे शुद्ध करने के लिए वसिष्ठ को दे दिया। लेकिन वसिष्ठ यह तुरन्त समझ गये कि उस मांस का कुछ भाग विकुक्षि ने पहले ही खा लिया है; अतएव उन्होंने कहा कि यह मांस श्राद्ध के अनुकूल नहीं है और इससे श्राद्ध नहीं किया जा सकता। |
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| विकुक्षि ने शेष मांस राजा इक्ष्वाकु को लाकर दे दिया जिन्होंने उसे शुद्ध करने के लिए वसिष्ठ को दे दिया। लेकिन वसिष्ठ यह तुरन्त समझ गये कि उस मांस का कुछ भाग विकुक्षि ने पहले ही खा लिया है; अतएव उन्होंने कहा कि यह मांस श्राद्ध के अनुकूल नहीं है और इससे श्राद्ध नहीं किया जा सकता। |
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