Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.6.53: कुछ समय तक उसने इस प्रकार से पारिवारिक कार्यों में अपना जीवन बिताया किन्तु बाद में वह भौतिक सुखों से वैराग्य हो गया। भौतिक संगति त्यागने हेतु वानप्रस्थ आश्रम स्वीकार किया और फिर जंगल चला गया। पतिव्रता पत्नियाँ भी उसके पीछे हो लीं क्योंकि उनके लिए पति के सिवा कोई आधार ही नहीं था।   |   bhagavat अध्याय 9.6: सौभरि मुनि का पतन   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  9.6.53 
एवं वसन् गृहे कालं विरक्तो न्यासमास्थित: ।
वनं जगामानुययुस्तत्पत्‍न्य: पतिदेवता: ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
कुछ समय तक उसने इस प्रकार से पारिवारिक कार्यों में अपना जीवन बिताया किन्तु बाद में वह भौतिक सुखों से वैराग्य हो गया। भौतिक संगति त्यागने हेतु वानप्रस्थ आश्रम स्वीकार किया और फिर जंगल चला गया। पतिव्रता पत्नियाँ भी उसके पीछे हो लीं क्योंकि उनके लिए पति के सिवा कोई आधार ही नहीं था।
 
Thus he spent his life in household chores for some time but later he became disinterested in material enjoyment. He took the path of Vanaprastha to renounce material company and then he went to the forest. The devoted wives followed him because they had no support other than their husbands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)