भोक्तारं यज्ञ-तपसां
सर्व-लोक-महेश्वरम्
सुहृदं सर्व-भूतानाम्
ज्ञात्वा मां शान्तिं ऋच्छति
"जो ऋषि मुझे सभी यज्ञों और तपस्याओं के परम प्रयोजन, सभी ग्रहों और देवताओं के परम प्रभु और सभी जीवित संस्थाओं के हितैषी और शुभचिंतक के रूप में जानते हैं, वे भौतिक दुखों की पीड़ा से शांति प्राप्त करते हैं।" इसलिए व्यक्ति को कृष्ण चेतना में प्रवेश करना चाहिए और नियमों का ठीक से पालन करके कृष्ण चेतना में उन्नति करनी चाहिए। तब व्यक्ति शांति और ज्ञान में एक शाश्वत, आनंदमय जीवन प्राप्त कर सकता है।
