श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.6.4 
क्षुवतस्तु मनोर्जज्ञे इक्ष्वाकुर्घ्राणत: सुत: ।
तस्य पुत्रशतज्येष्ठा विकुक्षिनिमिदण्डका: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
मनु के पुत्र का नाम इक्ष्वाकु था। जब मनु छींक रहे थे, उसी समय इक्ष्वाकु उनके नथुनों से उत्पन्न हो गए थे। राजा इक्ष्वाकु के सौ पुत्र थे, जिनमें से विकुक्षि, निमि और दण्डक सबसे प्रमुख थे।
 
Manu's son was Ikshvaku. When Manu was sneezing, Ikshvaku was born from his nostrils. King Ikshvaku had one hundred sons, out of which Vikukshi, Nimi and Dandaka were the prominent ones.
तात्पर्य
श्रीधर स्वामी के अनुसार, यद्यपि भागवतम (९.१.११-१२) ने इक्ष्वाकु को मनु की पत्नी श्रद्धा से उत्पन्न दस पुत्रों में शामिल किया है, यह एक सामान्यीकरण था। यहाँ विशेष रूप से बताया गया है कि इक्ष्वाकु का जन्म केवल मनु की छींक से हुआ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)