श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.6.32 
न ममार पिता तस्य विप्रदेवप्रसादत: ।
युवनाश्वोऽथ तत्रैव तपसा सिद्धिमन्वगात् ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
जबसे बालक के पिता युवनाश्व को ब्राह्मणों का आशीर्वाद मिला, तबसे उसकी मृत्यु नहीं हुई। इस घटना के पश्चात् उसने कठोर तपस्या की और उसी स्थान पर सिद्धि प्राप्त कर ली।
 
जबसे बालक के पिता युवनाश्व को ब्राह्मणों का आशीर्वाद मिला, तबसे उसकी मृत्यु नहीं हुई। इस घटना के पश्चात् उसने कठोर तपस्या की और उसी स्थान पर सिद्धि प्राप्त कर ली।
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