श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.6.3 
एते क्षेत्रप्रसूता वै पुनस्त्वाङ्गिरसा: स्मृता: ।
रथीतराणां प्रवरा: क्षेत्रोपेता द्विजातय: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
रथीतर की पत्नी के गर्भ से जन्म लेने के कारण ये सारे पुत्र रथीतर के वंशज कहलाए, किन्तु अंगिरा के वीर्य से उत्पन्न होने के कारण वे अंगिरा के वंशज भी कहलाए। रथीतर की संतानों में ये पुत्र सबसे अधिक प्रसिद्ध थे क्योंकि अपने जन्म के कारण ये ब्राह्मण समझे जाते थे।
 
रथीतर की पत्नी के गर्भ से जन्म लेने के कारण ये सारे पुत्र रथीतर के वंशज कहलाए, किन्तु अंगिरा के वीर्य से उत्पन्न होने के कारण वे अंगिरा के वंशज भी कहलाए। रथीतर की संतानों में ये पुत्र सबसे अधिक प्रसिद्ध थे क्योंकि अपने जन्म के कारण ये ब्राह्मण समझे जाते थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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