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श्लोक 9.6.28  |
उत्थितास्ते निशम्याथ व्युदकं कलशं प्रभो ।
पप्रच्छु: कस्य कर्मेदं पीतं पुंसवनं जलम् ॥ २८ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब सारे ब्राह्मण जगे और उन्होंने देखा कि जलपात्र खाली हुआ है तो उन्होंने पूछा कि संतान उत्पन्न करने वाले इस जल को किसने पिया है? |
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| जब सारे ब्राह्मण जगे और उन्होंने देखा कि जलपात्र खाली हुआ है तो उन्होंने पूछा कि संतान उत्पन्न करने वाले इस जल को किसने पिया है? |
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