भार्याशतेन निर्विण्ण ऋषयोऽस्य कृपालव: ।
इष्टिं स्म वर्तयांचक्रुरैन्द्रीं ते सुसमाहिता: ॥ २६ ॥
अनुवाद
हालाँकि युवनाश्व अपनी एक सौ पत्नियों को लेकर जंगल में चले गये थे, लेकिन वे सभी बहुत उदास थीं। वहाँ के ऋषि राजा पर बहुत दयालु थे, इसलिए उन्होंने पूरी मनोयोग से इन्द्र-यज्ञ करना शुरू कर दिया ताकि राजा को पुत्र की प्राप्ति हो सके।
Although Yuvanashva went to the forest with his one hundred wives, all of them were very sad. However, the sages of the forest were very kind to the king, so they started performing Indrayagya with devotion so that the king could have a son.
तात्पर्य
कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ वानप्रस्थ आश्रम के नियमों का पालन करते हुए जीवन व्यतीत कर सकता है, किंतु वानप्रस्थ का अर्थ है गृहस्थ जीवन से पूर्णतः निवृत्त होना होता है। यद्यपि राजा युवनाश्व ने अपने गृहस्थ जीवन से पूर्णतः संन्यास ले लिया था, परंतु उनके पुत्र न होने के कारण वे और उनकी पत्नियाँ हमेशा दुःखी रहते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥