श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.6.14 
वचनाद् देवदेवस्य विष्णोर्विश्वात्मन: प्रभो: ।
वाहनत्वे वृतस्तस्य बभूवेन्द्रो महावृष: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
पुरञ्जय सारे असुरों को मारने के लिए इस शर्त पर राजी हो गया कि इन्द्र उसकी सवारी बनेगा। गर्व के कारण इन्द्र ने शुरुआत में यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में भगवान विष्णु के आदेश पर उसने इसे स्वीकार कर लिया और पुरञ्जय की सवारी के लिए एक बड़ा सा बैल बन गया।
 
पुरञ्जय सारे असुरों को मारने के लिए इस शर्त पर राजी हो गया कि इन्द्र उसकी सवारी बनेगा। गर्व के कारण इन्द्र ने शुरुआत में यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में भगवान विष्णु के आदेश पर उसने इसे स्वीकार कर लिया और पुरञ्जय की सवारी के लिए एक बड़ा सा बैल बन गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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