श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.6.12 
पुरञ्जयस्तस्य सुत इन्द्रवाह इतीरित: ।
ककुत्स्थ इति चाप्युक्त: श‍ृणु नामानि कर्मभि: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
शशाद का पुत्र पुरञ्जय था, जो इन्द्रवाह के रूप में और कभी-कभी ककुत्स्थ के नाम से भी जाना जाता है। अब मेरे द्वारा यह सुनें कि उसने अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग नाम कैसे प्राप्त किए।
 
शशाद का पुत्र पुरञ्जय था, जो इन्द्रवाह के रूप में और कभी-कभी ककुत्स्थ के नाम से भी जाना जाता है। अब मेरे द्वारा यह सुनें कि उसने अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग नाम कैसे प्राप्त किए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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