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bhagavat 9.5.8: हे अथक सैन्य, जब तुम्हें ईश्वर के द्वारा दैत्यों और दानवों के सैनिकों के बीच भेजा जाता है तो तुम युद्ध के मैदान में डटे रहते हो और उनके भुजाओं, पेटों, जांघों, पैरों और सिरों को लगातार अलग करते रहते हो।   |   bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.5.8 
यदा विसृष्टस्त्वमनञ्जनेन वै
बलं प्रविष्टोऽजित दैत्यदानवम् ।
बाहूदरोर्वङ्‌घ्रिशिरोधराणि
वृश्चन्नजस्रं प्रधने विराजसे ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
हे अथक सैन्य, जब तुम्हें ईश्वर के द्वारा दैत्यों और दानवों के सैनिकों के बीच भेजा जाता है तो तुम युद्ध के मैदान में डटे रहते हो और उनके भुजाओं, पेटों, जांघों, पैरों और सिरों को लगातार अलग करते रहते हो।
 
O Ajita, when you are sent by the Lord to enter among the armies of the demons and giants, you remain firm on the battlefield and continuously sever their hands, bellies, thighs, feet and heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)