Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.5.3: महाराज अम्बरीष बोले : हे सुदर्शन चक्र, तुम अग्नि हो, तुम परम शक्तिशाली सूर्य हो और तुम सम्पूर्ण नक्षत्रों के स्वामी चंद्रमा हो। तुम जल, पृथ्वी और आकाश हो, तुम पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (ध्वनि, स्पर्श, रूप, स्वाद और गंध) हो और तुम स्वयं इन्द्रियाँ भी हो।   |   bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.5.3 
अम्बरीष उवाच
त्वमग्निर्भगवान् सूर्यस्त्वं सोमो ज्योतिषां पति: ।
त्वमापस्त्वं क्षितिर्व्योम वायुर्मात्रेन्द्रियाणि च ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
महाराज अम्बरीष बोले : हे सुदर्शन चक्र, तुम अग्नि हो, तुम परम शक्तिशाली सूर्य हो और तुम सम्पूर्ण नक्षत्रों के स्वामी चंद्रमा हो। तुम जल, पृथ्वी और आकाश हो, तुम पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (ध्वनि, स्पर्श, रूप, स्वाद और गंध) हो और तुम स्वयं इन्द्रियाँ भी हो।
 
Maharaja Ambarisha said: O Sudarshana Chakra, you are the fire, you are the supremely powerful Sun and you are the Moon, the Lord of all the stars. You are water, earth and sky, you are the five senses (sound, touch, sight, taste and smell) and you are the senses as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)