Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.5.2: जब दुर्वासा ने महाराज अम्बरीष के चरण स्पर्श किए, तो वे बहुत लज्जित हुए और जब उन्होंने देखा कि दुर्वासा उनका स्तवन कर रहे हैं, तो वे दयावश और भी अधिक व्यथित हो उठे। अतः उन्होंने तुरन्त ही भगवान् के महान व्रत का स्तवन प्रारम्भ कर दिया। | bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब दुर्वासा ने महाराज अम्बरीष के चरण स्पर्श किए, तो वे बहुत लज्जित हुए और जब उन्होंने देखा कि दुर्वासा उनका स्तवन कर रहे हैं, तो वे दयावश और भी अधिक व्यथित हो उठे। अतः उन्होंने तुरन्त ही भगवान् के महान व्रत का स्तवन प्रारम्भ कर दिया।
When the sage Durvasa touched the feet of Maharaja Ambarisha, he became very ashamed, and when he saw that Durvasa was trying to praise him, he became even more aggrieved out of pity. So he immediately began to praise the great weapon of the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥