Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.5.18: दुर्वासा मुनि के वापस आने की उम्मीद में राजा ने खुद खाना नहीं खाया था। इसलिए, जब ऋषि वापस लौटे, तो राजा उनके चरणों में गिर पड़ा और उन्हें हर तरह से खुश करके उनका जी भरकर भोजन कराया। | bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा तमकृताहार: प्रत्यागमनकाङ्क्षuया ।
चरणावुपसङ्गृह्य प्रसाद्य समभोजयत् ॥ १८ ॥
अनुवाद
दुर्वासा मुनि के वापस आने की उम्मीद में राजा ने खुद खाना नहीं खाया था। इसलिए, जब ऋषि वापस लौटे, तो राजा उनके चरणों में गिर पड़ा और उन्हें हर तरह से खुश करके उनका जी भरकर भोजन कराया।
The king had not eaten anything in anticipation of the return of Durvasa Muni. Therefore, when the sage returned, the king fell at his lotus feet and fed him to his heart's content.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥