Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.5.17: हे राजन, मेरे अपराधों को नजरअंदाज करते हुए आपने मेरे जीवन को बचाया है। इस प्रकार, मैं आपके प्रति अत्यधिक कृतज्ञ हूँ क्योंकि आप बहुत दयालु हैं।   |   bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.5.17 
राजन्ननुगृहीतोऽहं त्वयातिकरुणात्मना ।
मदघं पृष्ठत: कृत्वा प्राणा यन्मेऽभिरक्षिता: ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, मेरे अपराधों को नजरअंदाज करते हुए आपने मेरे जीवन को बचाया है। इस प्रकार, मैं आपके प्रति अत्यधिक कृतज्ञ हूँ क्योंकि आप बहुत दयालु हैं।
 
O King, you have spared my life by overlooking my crimes. Thus I am extremely grateful to you because you are so merciful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)