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bhagavat 9.5.16: प्रभु के सेवकों के लिए क्या असंभव है? उनके पवित्र नाम को सुनकर ही मनुष्य शुद्ध हो जाता है।   |   bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.5.16 
यन्नामश्रुतिमात्रेण पुमान् भवति निर्मल: ।
तस्य तीर्थपद: किं वा दासानामवशिष्यते ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
प्रभु के सेवकों के लिए क्या असंभव है? उनके पवित्र नाम को सुनकर ही मनुष्य शुद्ध हो जाता है।
 
What is impossible for the servants of God? A man becomes pure simply by hearing the holy name of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)