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bhagavat 9.5.10: यदि हमारे परिवार ने पात्रों को दान दिया है, यदि हमने धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों को पूरा किया है, यदि हमने अपने कार्यों को अच्छी तरह से किया है और यदि हमें विद्वान ब्राह्मणों का मार्गदर्शन मिला है, तो मैं चाहूँगा कि इसके बदले में इस ब्राह्मण को सुदर्शन चक्र की जलन से मुक्ति मिल जाए।   |   bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.5.10 
यद्यस्ति दत्तमिष्टं वा स्वधर्मो वा स्वनुष्ठित: ।
कुलं नो विप्रदैवं चेद् द्विजो भवतु विज्वर: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
यदि हमारे परिवार ने पात्रों को दान दिया है, यदि हमने धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों को पूरा किया है, यदि हमने अपने कार्यों को अच्छी तरह से किया है और यदि हमें विद्वान ब्राह्मणों का मार्गदर्शन मिला है, तो मैं चाहूँगा कि इसके बदले में इस ब्राह्मण को सुदर्शन चक्र की जलन से मुक्ति मिल जाए।
 
If our family has given charity to deserving people, if we have performed rituals and sacrifices, if we have performed our professional duties properly and if we have been guided by learned brahmins, then I would like that in return this brahmin be freed from the burning sensation caused by the Sudarshan Chakra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)