Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.5.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब भगवान् विष्णु ने दुर्वासा मुनि को इस प्रकार सलाह दी तो सुदर्शन चक्र से अत्यधिक परेशान मुनि तुरन्त ही महाराज अम्बरीष के पास पहुँचे। अत्यंत दुःखी होकर मुनि ने राजा के चरणों में गिरकर उन्हें पकड़ लिया। | bhagavat अध्याय 9.5: दुर्वासा मुनि को जीवन-दान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
एवं भगवतादिष्टो दुर्वासश्चक्रतापित: ।
अम्बरीषमुपावृत्य तत्पादौ दु:खितोऽग्रहीत् ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब भगवान् विष्णु ने दुर्वासा मुनि को इस प्रकार सलाह दी तो सुदर्शन चक्र से अत्यधिक परेशान मुनि तुरन्त ही महाराज अम्बरीष के पास पहुँचे। अत्यंत दुःखी होकर मुनि ने राजा के चरणों में गिरकर उन्हें पकड़ लिया।
Sukadeva Goswami said: When Lord Viṣṇu thus advised the sage Durvāsa, who was greatly distressed by the Sudarshana Cakra, he immediately went to Mahārāja Ambarīṣa. Being extremely distressed, he fell at the king's lotus feet and held them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥