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bhagavat 9.4.8: नाभाग के पिता ने कहा: दक्ष के यज्ञ में जो कुछ भी ऋषियों ने आहुति दी थी, वह उसे शिवजी के भाग के रूप में अर्पित किया था। तो यज्ञशाला की प्रत्येक चीज निश्चित रूप से शिवजी की ही है।   |   bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.4.8 
यज्ञवास्तुगतं सर्वमुच्छिष्टमृषय: क्‍वचित् ।
चक्रुर्हि भागं रुद्राय स देव: सर्वमर्हति ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
नाभाग के पिता ने कहा: दक्ष के यज्ञ में जो कुछ भी ऋषियों ने आहुति दी थी, वह उसे शिवजी के भाग के रूप में अर्पित किया था। तो यज्ञशाला की प्रत्येक चीज निश्चित रूप से शिवजी की ही है।
 
Nabhaga's father said: Whatever the sages had offered in the Daksha Yagyashala, it was given to Lord Shiva as his share. Therefore every item in this Yagyashala definitely belongs to Lord Shiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)