ब्रह्मादि-भक्ति-कोट्य-अंशाद
अंशो नैवंबरीषके
नैवन्यास्य चक्रस्यापि
तथापि हरि ईश्वरः
तत्कालिकोपासेयत्वत्
तेषां यशस अदिरात
ब्रह्मदयाश्च तत्-कीर्तिम्
व्यञ्जयाम् असुर उत्तमम्
मोहनाय च दैत्यानाम्
ब्रह्मादे निन्दानाय च
अन्यार्थं च स्वयं विष्णुर
ब्रह्मद्यश्च च निराशाः
मानुषेषुत्तमत्वच च
तेषां भक्त्यादिभिर गुणैः
ब्रह्मादेर विष्णु-अधिनत्व-
ज्ञानपानय च केवलम्
दुर्वासाश् च स्वयम् रुद्रः
तथापि अन्यम् उक्तवान्
तस्यपि अनुग्रहार्थाय
दर्प-नाशार्थम् एव च
महाराज अम्बरीष और दुर्वासा मुनि के विषय में इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव सहित सभी देवता, भगवान विष्णु के नियंत्रण में हैं। इसलिए, जब कोई वैष्णव नाराज होता है, तो अपराधी को विष्णु, परम भगवान द्वारा दंडित किया जाता है। ऐसे व्यक्ति की कोई भी रक्षा नहीं कर सकता, यहाँ तक कि भगवान ब्रह्मा या भगवान शिव भी नहीं।
