श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  9.4.71 
ब्रह्मंस्तद् गच्छ भद्रं ते नाभागतनयं नृपम् ।
क्षमापय महाभागं तत: शान्तिर्भविष्यति ॥ ७१ ॥
 
 
अनुवाद
अतः हे श्रेष्ठ ब्राह्मण, तुम तुरंत महाराज नाभाग के पुत्र राजा अम्बरीष के पास चले जाओ। मैं तुम्हारे कल्याण की कामना करता हूँ। यदि तुम महाराज अम्बरीष को प्रसन्न कर सके तो तुम्हें सुकून मिलेगा।
 
अतः हे श्रेष्ठ ब्राह्मण, तुम तुरंत महाराज नाभाग के पुत्र राजा अम्बरीष के पास चले जाओ। मैं तुम्हारे कल्याण की कामना करता हूँ। यदि तुम महाराज अम्बरीष को प्रसन्न कर सके तो तुम्हें सुकून मिलेगा।
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत चौथा अध्याय समाप्त होता है ।
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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