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श्लोक 9.4.7  |
ममेदमृषिभिर्दत्तमिति तर्हि स्म मानव: ।
स्यान्नौ ते पितरि प्रश्न: पृष्टवान् पितरं यथा ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| तब नाभाग ने कहा, “यह धन मेरा है। यह ऋषियों ने मुझे दिया है।” जब नाभाग ने यह कहा तो उस काले कलूटे ने उत्तर दिया, “चलो तुम्हारे पिता के पास जाकर उनसे इस विवाद का निपटारा करने को कहें।” उस बात पर सहमति हो जाने के बाद नाभाग ने अपने पिता से पूछा। |
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| तब नाभाग ने कहा, “यह धन मेरा है। यह ऋषियों ने मुझे दिया है।” जब नाभाग ने यह कहा तो उस काले कलूटे ने उत्तर दिया, “चलो तुम्हारे पिता के पास जाकर उनसे इस विवाद का निपटारा करने को कहें।” उस बात पर सहमति हो जाने के बाद नाभाग ने अपने पिता से पूछा। |
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