Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.4.7: तब नाभाग ने कहा, “यह धन मेरा है। यह ऋषियों ने मुझे दिया है।” जब नाभाग ने यह कहा तो उस काले कलूटे ने उत्तर दिया, “चलो तुम्हारे पिता के पास जाकर उनसे इस विवाद का निपटारा करने को कहें।” उस बात पर सहमति हो जाने के बाद नाभाग ने अपने पिता से पूछा। | bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ममेदमृषिभिर्दत्तमिति तर्हि स्म मानव: ।
स्यान्नौ ते पितरि प्रश्न: पृष्टवान् पितरं यथा ॥ ७ ॥
अनुवाद
तब नाभाग ने कहा, “यह धन मेरा है। यह ऋषियों ने मुझे दिया है।” जब नाभाग ने यह कहा तो उस काले कलूटे ने उत्तर दिया, “चलो तुम्हारे पिता के पास जाकर उनसे इस विवाद का निपटारा करने को कहें।” उस बात पर सहमति हो जाने के बाद नाभाग ने अपने पिता से पूछा।
Then Nabhaga said: “This wealth is mine. The sages have given it to me.” When Nabhaga said this, the black man replied, “Let us go to your father and ask him to settle this.” Accordingly Nabhaga asked his father.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥