Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.4.50: जैसे ही जंगल की आग की तेज लपटें एक साँप का पीछा कर रही थीं, ठीक उसी प्रकार भगवान् का चक्र दुर्वासा मुनि का पीछा करने लगा। दुर्वासा मुनि ने देखा कि चक्र उनकी पीठ को लगभग छूने वाला है, इसलिए वे बहुत तेजी से दौड़े, सुमेरु पर्वत की एक गुफा में प्रवेश करने की इच्छा से। | bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे ही जंगल की आग की तेज लपटें एक साँप का पीछा कर रही थीं, ठीक उसी प्रकार भगवान् का चक्र दुर्वासा मुनि का पीछा करने लगा। दुर्वासा मुनि ने देखा कि चक्र उनकी पीठ को लगभग छूने वाला है, इसलिए वे बहुत तेजी से दौड़े, सुमेरु पर्वत की एक गुफा में प्रवेश करने की इच्छा से।
Just as the flames of fire chase a snake, similarly the discus of the Lord started chasing Durvasa Muni. Durvasa Muni saw that this discus was about to touch his back and hence he wanted to run fast and enter the cave of Sumeru Mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥