Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.4.46: जैसे ही दुर्वासा मुनि ने यह कहा, गुस्से से उनका चेहरा लाल हो गया। महाराज अम्बरीष को दंडित करने के लिए उन्होंने अपने सिर के बालों को उखाड़ा और विनाश की धधकती आग जैसा एक दानव बना दिया। | bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं ब्रुवाण उत्कृत्य जटां रोषप्रदीपित: ।
तया स निर्ममे तस्मै कृत्यां कालानलोपमाम् ॥ ४६ ॥
अनुवाद
जैसे ही दुर्वासा मुनि ने यह कहा, गुस्से से उनका चेहरा लाल हो गया। महाराज अम्बरीष को दंडित करने के लिए उन्होंने अपने सिर के बालों को उखाड़ा और विनाश की धधकती आग जैसा एक दानव बना दिया।
When Durvasa Muni said this, his face turned red with anger. He plucked a hair from his matted locks and created a Kritya to punish Maharaja Ambrish which was blazing like the fire of destruction.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥