| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान » श्लोक 43 |
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| | | | श्लोक 9.4.43  | मन्युना प्रचलद्गात्रो भ्रुकुटीकुटिलानन: ।
बुभुक्षितश्च सुतरां कृताञ्जलिमभाषत ॥ ४३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | भूखे, काँपते हुए शरीर, टेढ़े मुँह और गुस्से से टेढ़ी भौहें किये दुर्वासा मुनि ने हाथ जोड़े खड़े राजा अम्बरीष से इस प्रकार क्रोधपूर्वक कहा। | | | | भूखे, काँपते हुए शरीर, टेढ़े मुँह और गुस्से से टेढ़ी भौहें किये दुर्वासा मुनि ने हाथ जोड़े खड़े राजा अम्बरीष से इस प्रकार क्रोधपूर्वक कहा। | | ✨ ai-generated | | |
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