ब्राह्मणातिक्रमे दोषो द्वादश्यां यदपारणे ।
यत् कृत्वा साधु मे भूयादधर्मो वा न मां स्पृशेत् ॥ ३९ ॥
अम्भसा केवलेनाथ करिष्ये व्रतपारणम् ।
आहुरब्भक्षणं विप्रा ह्यशितं नाशितं च तत् ॥ ४० ॥
अनुवाद
राजा ने कहा: "ब्राह्मणों के साथ आदरणीय व्यवहार के नियमों का उल्लंघन निश्चित रूप से बहुत बड़ा अपराध है। दूसरी ओर, यदि कोई द्वादशी की तिथि के भीतर अपना व्रत नहीं तोड़ता है, तो व्रत के पालन में दोष आता है। इसलिए, हे ब्राह्मणों, यदि आप सोचते हैं कि यह शुभ है और अधार्मिक नहीं है, तो मैं पानी पीकर व्रत तोड़ दूँगा।" इस प्रकार, ब्राह्मणों से परामर्श करने के बाद, राजा इस निर्णय पर पहुँचा, क्योंकि ब्राह्मणों के अनुसार, पानी पीना खाने के समान माना जा सकता है और न खाने के समान भी।
The king said: “Violating the rules of hospitality towards Brahmins is certainly a great crime. On the other hand, if someone does not break his fast on the Dwadashi date, then there is a fault in observing the fast. Therefore, O Brahmins, if you people think that this is auspicious and not unrighteous, then I should break the fast by drinking water.” Thus, after consulting the Brahmins, the king came to the conclusion that according to the opinion of the Brahmins, drinking water and eating food may or may not be acceptable.
तात्पर्य
जब अपनी दुविधा में महाराज अम्बरीष ने ब्राह्मणों से सलाह ली कि क्या उन्हें उपवास तोड़ देना चाहिए या दुर्वासा मुनि का इंतजार करना चाहिए, तो स्पष्टतः वे यह बताने में असमर्थ रहे कि क्या करना चाहिए। हालाँकि, एक वैष्णव सबसे बुद्धिमान व्यक्ति होता है। इसलिए महाराज अम्बरीष ने स्वयं ब्राह्मणों की उपस्थिति में निर्णय लिया कि वह थोड़ा पानी पियेंगे, इससे उपवास टूटने की पुष्टि हो जाएगी लेकिन ब्राह्मण के स्वागत के नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। वेदों में कहा गया है, अपोऽश्नाति तन्नैवाशितं नैवानशितं। यह वैदिक निषेधाज्ञा घोषित करती है कि पानी पीना खाने या न खाने के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। कभी-कभी हमारे व्यावहारिक अनुभव में हम देखते हैं कि सत्याग्रह का पालन करने वाले कुछ राजनीतिक नेता भोजन नहीं करेंगे लेकिन पानी पीएँगे। यह विचार करते हुए कि पानी पीना खाना नहीं होगा, महाराज अम्बरीष ने इस तरह से कार्य करने का निर्णय लिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥