Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.4.38: इसी बीच, व्रत तोड़ने के लिए द्वादशी का आधा मुहूर्त ही शेष था। इसलिए, तुरंत व्रत तोड़ देना जरूरी था। ऐसी विकट परिस्थिति में राजा ने विद्वान ब्राह्मणों से सलाह मशविरा किया।   |   bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  9.4.38 
मुहूर्तार्धावशिष्टायां द्वादश्यां पारणं प्रति ।
चिन्तयामास धर्मज्ञो द्विजैस्तद्धर्मसङ्कटे ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच, व्रत तोड़ने के लिए द्वादशी का आधा मुहूर्त ही शेष था। इसलिए, तुरंत व्रत तोड़ देना जरूरी था। ऐसी विकट परिस्थिति में राजा ने विद्वान ब्राह्मणों से सलाह मशविरा किया।
 
By then only half the Muhurta of Dwadashi was left for breaking the fast. As a result, it was necessary to break the fast immediately. In such a difficult situation, the king consulted learned Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)