श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.4.30 
व्रतान्ते कार्तिके मासि त्रिरात्रं समुपोषित: ।
स्‍नात: कदाचित् कालिन्द्यां हरिं मधुवनेऽर्चयत् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
कार्तिक माह में, एक वर्ष तक उस व्रत को पालने के बाद, तीन रातों का उपवास रखने और यमुना में स्नान करने के बाद, महाराज अम्बरीष ने मधुवन में भगवान हरि की पूजा की।
 
कार्तिक माह में, एक वर्ष तक उस व्रत को पालने के बाद, तीन रातों का उपवास रखने और यमुना में स्नान करने के बाद, महाराज अम्बरीष ने मधुवन में भगवान हरि की पूजा की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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