श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.4.2 
भ्रातरोऽभाङ्क्त किं मह्यं भजाम पितरं तव ।
त्वां ममार्यास्तताभाङ्‍क्षुर्मा पुत्रक तदाद‍ृथा: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
नाभाग ने पूछा, "मेरे भाइयों, पिताजी की सम्पत्ति में से मेरे हिस्से में आप लोगों ने क्या दिया है?" उसके बड़े भाइयों ने उत्तर दिया, “हमने तुम्हारे हिस्से में पिताजी को रख दिया है।" तब नाभाग अपने पिता के पास गया और बोला, "हे पिताजी, मेरे भाइयों ने मेरे हिस्से में आपको दिया है।" इस पर पिता ने उत्तर दिया, “मेरे बेटे, तू इनके कपटपूर्ण शब्दों पर विश्वास मत करना। मैं तेरी सम्पत्ति नहीं हूँ।"
 
नाभाग ने पूछा, "मेरे भाइयों, पिताजी की सम्पत्ति में से मेरे हिस्से में आप लोगों ने क्या दिया है?" उसके बड़े भाइयों ने उत्तर दिया, “हमने तुम्हारे हिस्से में पिताजी को रख दिया है।" तब नाभाग अपने पिता के पास गया और बोला, "हे पिताजी, मेरे भाइयों ने मेरे हिस्से में आपको दिया है।" इस पर पिता ने उत्तर दिया, “मेरे बेटे, तू इनके कपटपूर्ण शब्दों पर विश्वास मत करना। मैं तेरी सम्पत्ति नहीं हूँ।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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