नाभागादम्बरीषोऽभून्महाभागवत: कृती ।
नास्पृशद् ब्रह्मशापोऽपि यं न प्रतिहत: क्वचित् ॥ १३ ॥
अनुवाद
नाभाग से महाराज अम्बरीष का जन्म हुआ। महाराज अम्बरीष एक महान भक्त थे और अपने अच्छे गुणों के लिए जाने जाते थे। हालाँकि उन्हें एक अचूक ब्राह्मण ने शाप दिया था, पर वह शाप उनको छू भी नहीं पाया।
Maharaja Ambrish was born from Naabhaga. Maharaja Ambrish was a great devotee and was famous for his great virtues. Although he was cursed by an Achyuta Brahmin, that curse could not even touch him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥