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श्लोक 9.4.13  |
नाभागादम्बरीषोऽभून्महाभागवत: कृती ।
नास्पृशद् ब्रह्मशापोऽपि यं न प्रतिहत: क्वचित् ॥ १३ ॥ |
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| अनुवाद |
| नाभाग से महाराज अम्बरीष का जन्म हुआ। महाराज अम्बरीष एक महान भक्त थे और अपने अच्छे गुणों के लिए जाने जाते थे। हालाँकि उन्हें एक अचूक ब्राह्मण ने शाप दिया था, पर वह शाप उनको छू भी नहीं पाया। |
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| नाभाग से महाराज अम्बरीष का जन्म हुआ। महाराज अम्बरीष एक महान भक्त थे और अपने अच्छे गुणों के लिए जाने जाते थे। हालाँकि उन्हें एक अचूक ब्राह्मण ने शाप दिया था, पर वह शाप उनको छू भी नहीं पाया। |
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