Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.4.12: प्रातःकाल और सायंकाल अत्यन्त ध्यान से इस कथा को सुनने या स्मरण करने से व्यक्ति निश्चय ही विद्वान हो जाता है। वह वैदिक मंत्रों के अर्थों को समझने वाला हो जाता है और जीवन की वास्तविकता को जानने वाला भी हो जाता है। | bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य एतत् संस्मरेत् प्रात: सायं च सुसमाहित: ।
कविर्भवति मन्त्रज्ञो गतिं चैव तथात्मन: ॥ १२ ॥
अनुवाद
प्रातःकाल और सायंकाल अत्यन्त ध्यान से इस कथा को सुनने या स्मरण करने से व्यक्ति निश्चय ही विद्वान हो जाता है। वह वैदिक मंत्रों के अर्थों को समझने वाला हो जाता है और जीवन की वास्तविकता को जानने वाला भी हो जाता है।
Whoever listens to or remembers this story very attentively in the morning and evening, certainly becomes a scholar, understands the Vedic hymns and becomes a self-realized person.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥