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bhagavat 9.3.7: अत्यधिक भयभीत सुकन्या ने अपने पिता से कहा: मैंने कुछ गलत काम किया है, क्योंकि अनजाने में मैंने इन दो चमकीली वस्तुओं को काँटे से चुभो दिया है।   |   bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.3.7 
सुकन्या प्राह पितरं भीता किञ्चित् कृतं मया ।
द्वे ज्योतिषी अजानन्त्या निर्भिन्ने कण्टकेन वै ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
अत्यधिक भयभीत सुकन्या ने अपने पिता से कहा: मैंने कुछ गलत काम किया है, क्योंकि अनजाने में मैंने इन दो चमकीली वस्तुओं को काँटे से चुभो दिया है।
 
Sukanya, extremely frightened, said to her father: I have done something wrong because I unknowingly pierced these two shiny objects with the thorn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)