Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.3.35: ब्रह्माजी के आदेश को पाकर ककुद्मी ने उन्हें प्रणाम किया और अपने निवासस्थान लौट गया। वहाँ पहुँचकर उसने पाया कि उसका घर खाली है, उसके भाई और अन्य परिजन उसे छोड़कर चले गये हैं और यक्षों जैसे उच्चतर जीवों के डर से वे चारों दिशाओं में फैल गये हैं। | bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्माजी के आदेश को पाकर ककुद्मी ने उन्हें प्रणाम किया और अपने निवासस्थान लौट गया। वहाँ पहुँचकर उसने पाया कि उसका घर खाली है, उसके भाई और अन्य परिजन उसे छोड़कर चले गये हैं और यक्षों जैसे उच्चतर जीवों के डर से वे चारों दिशाओं में फैल गये हैं।
On receiving this order from Brahma, Kakudmi saluted him and returned to his abode. Then he saw that his abode was empty, his brothers and other relatives had left him and were living in all directions due to fear of higher beings like the Yakshas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥