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bhagavat 9.3.33: हे राजन, तुम यहाँ से चले जाओ और अपनी पुत्री को भगवान बलदेव को अर्पित कर दो जो अभी भी यहाँ उपस्थित हैं। वे परम शक्तिशाली हैं। निःसंदेह, वे स्वयं भगवान हैं और उनके अंश रूपी भगवान विष्णु ही हैं। तुम्हारी पुत्री उन्हें दान में देने योग्य है।   |   bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.3.33 
तद् गच्छ देवदेवांशो बलदेवो महाबल: ।
कन्यारत्नमिदं राजन् नररत्नाय देहि भो: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, तुम यहाँ से चले जाओ और अपनी पुत्री को भगवान बलदेव को अर्पित कर दो जो अभी भी यहाँ उपस्थित हैं। वे परम शक्तिशाली हैं। निःसंदेह, वे स्वयं भगवान हैं और उनके अंश रूपी भगवान विष्णु ही हैं। तुम्हारी पुत्री उन्हें दान में देने योग्य है।
 
O King, go from here and offer your daughter to Lord Baladeva who is still present. He is very powerful. Indeed, He is the Supreme Personality of Godhead and His own portion is Vishnu. Your daughter is most suitable to be offered to Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)