तत्पुत्रपौत्रनप्तृणां गोत्राणि च न शृण्महे ।
कालोऽभियातस्त्रिणवचतुर्युगविकल्पित: ॥ ३२ ॥
अनुवाद
सत्ताईस चतुर्युग बीत चुके हैं। जिन लोगों को तुमने रेवती के पति के तौर पर चुना होगा, वे अब सब चल बसे हैं। उनके बेटे, नाती और बाकी खानदान के लोग भी नहीं रहे। अब तुम उनके नाम तक नहीं सुन पाओगे।
Twenty-seven Chaturyugas have passed. All the people whom you would have wanted to make Revati's husband are now gone and their sons, grandsons and other descendants are also no more. Now you will not even hear their names.
तात्पर्य
प्रभु ब्रह्मा के दिनों में चौदह मनु अर्थात एक हजार महा-युग बीत जाते हैं। ब्रह्मा ने राजा ककुद्मी को सूचित किया था कि सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग इन चार युगों से युक्त सत्ताईस महा-युग पहले ही बीत चुके हैं। उन युगों में उत्पन्न हुए सभी राजाओं और अन्य महान व्यक्तियों को अब स्मृति से ओझल किया जा चुका है। काल का यही स्वरूप है क्योंकि यह अतीत, वर्तमान और भविष्य में घूमता रहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥