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bhagavat 9.3.30: जब ककुद्मी वहाँ पहुँचा तो ब्रह्माजी गन्धर्वों का संगीत सुनने में लीन थे और उन्हें बात करने का समय नहीं था। इसलिए ककुद्मी ने इंतजार किया, और संगीत समाप्त होने के बाद उन्होंने ब्रह्माजी को प्रणाम किया और अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा व्यक्त की।   |   bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.3.30 
आवर्तमाने गान्धर्वे स्थितोऽलब्धक्षण: क्षणम् ।
तदन्त आद्यमानम्य स्वाभिप्रायं न्यवेदयत् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जब ककुद्मी वहाँ पहुँचा तो ब्रह्माजी गन्धर्वों का संगीत सुनने में लीन थे और उन्हें बात करने का समय नहीं था। इसलिए ककुद्मी ने इंतजार किया, और संगीत समाप्त होने के बाद उन्होंने ब्रह्माजी को प्रणाम किया और अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा व्यक्त की।
 
When Kakudmi reached there, Brahmaji was busy listening to the music of the Gandharvas and he did not have any time to talk. Therefore Kakudmi kept waiting and when the music ended, he greeted Brahmaji and expressed his long-standing desire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)