Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.3.25: इन्द्र क्रुद्ध होकर, च्यवन मुनि को मार डालना चाहता था, और इसलिए उसने तत्काल ही अपने वज्र को उठा लिया। किन्तु च्यवन मुनि ने अपनी शक्तियों से, इन्द्र के उस हाथ को लकवाग्रस्त कर दिया जिसमें उसने वज्र पकड़ा हुआ था। | bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र क्रुद्ध होकर, च्यवन मुनि को मार डालना चाहता था, और इसलिए उसने तत्काल ही अपने वज्र को उठा लिया। किन्तु च्यवन मुनि ने अपनी शक्तियों से, इन्द्र के उस हाथ को लकवाग्रस्त कर दिया जिसमें उसने वज्र पकड़ा हुआ था।
Being agitated and angry, Indra wanted to kill Chyavan Muni, so without thinking, he took up his Vajra. But Chyavan Muni with his might made Indra unconscious of the arm with which he was holding the Vajra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥