चिकीर्षितं ते किमिदं पतिस्त्वया
प्रलम्भितो लोकनमस्कृतो मुनि: ।
यत् त्वं जराग्रस्तमसत्यसम्मतं
विहाय जारं भजसेऽमुमध्वगम् ॥ २० ॥
अनुवाद
हे दुराचारिणी कन्या, तूने यह क्या कर दिखाया? तूने अपने उन सर्वमान्य सम्मानीय पति को ठगा है, क्योंकि मुझे लगता है कि वह वृद्ध, रोगी और इसलिए बदसूरत था, तू उसके साथ रहना छोड़कर इस युवक को अपना पति बनाना चाहती है, जो एक भिखारी जैसा दिखता है।
O wicked girl, what have you done? You have betrayed your most honorable husband, for I see that because he is old, sick and unattractive, you have left him and have chosen this young man who looks like a beggar as your husband.
तात्पर्य
यह वैदिक संस्कृति के मूल्यों को दर्शाता है। परिस्थितियों के अनुसार, सुकन्या को एक ऐसे पति को दिया गया था जो उसके साथ संगत होने के लिए बहुत बूढ़ा था। क्योंकि च्यवन मुनि रोगी और बहुत बूढ़े थे, वह निश्चित रूप से राजा शर्याति की सुंदर बेटी के लिए अयोग्य थे। फिर भी, उसके पिता को उम्मीद थी कि वह अपने पति के प्रति वफादार रहेगी। जब उन्होंने अचानक देखा कि उनकी बेटी ने किसी और को स्वीकार कर लिया है, भले ही वह आदमी जवान और सुंदर था, तो उन्होंने तुरंत उसे असती, अपवित्र के रूप में चेतावनी दी, क्योंकि उन्होंने मान लिया था कि उसने अपने पति की उपस्थिति में दूसरे आदमी को स्वीकार कर लिया है। वैदिक संस्कृति के अनुसार, भले ही एक युवती को बूढ़ा पति दिया जाता है, उसे उसका सम्मानपूर्वक पालन करना चाहिए। यह पवित्रता है। ऐसा नहीं है कि क्योंकि वह अपने पति को नापसंद करती है वह उसे छोड़ कर दूसरे को स्वीकार कर सकती है। यह वैदिक संस्कृति के विरुद्ध है। वैदिक संस्कृति के अनुसार, एक महिला को अपने माता-पिता द्वारा दिए गए पति को स्वीकार करना चाहिए और उसके प्रति शुद्ध और वफादार रहना चाहिए। इसलिए राजा शर्याति सुकन्या के पास एक युवक को देखकर हैरान रह गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥