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bhagavat 9.3.17: दोनों अश्विनीकुमार सुकन्या के सतीत्व और निष्ठा को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। इसलिये उन्होंने उसे उसके पति च्यवन मुनि के पास ले जाया और फिर उनसे अनुमति लेकर वे अपने विमान से स्वर्गलोक को वापस लौट गये।   |   bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.3.17 
दर्शयित्वा पतिं तस्यै पातिव्रत्येन तोषितौ ।
ऋषिमामन्‍त्र्य ययतुर्विमानेन त्रिविष्टपम् ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
दोनों अश्विनीकुमार सुकन्या के सतीत्व और निष्ठा को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। इसलिये उन्होंने उसे उसके पति च्यवन मुनि के पास ले जाया और फिर उनसे अनुमति लेकर वे अपने विमान से स्वर्गलोक को वापस लौट गये।
 
Both Ashwinikumars were very pleased to see the chastity and devotion of Sukanaya. So they showed her to her husband Chyavan Muni and then after taking permission from him they returned to heaven in their plane.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)