Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.3.12: च्यवन मुनि बोले : हालाँकि तुम दोनों यज्ञ में सोमरस पीने के अधिकारी नहीं हो, किन्तु मैं वचन देता हूँ कि मैं तुम्हें सोमरस से भरा हुआ पूरा बर्तन दूँगा। कृपा करके मेरे लिए सौन्दर्य और युवावस्था का प्रबन्ध करो क्योंकि नवयौवना स्त्रियों को वे आकर्षक लगते हैं। | bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ग्रहं ग्रहीष्ये सोमस्य यज्ञे वामप्यसोमपो: ।
क्रियतां मे वयो रूपं प्रमदानां यदीप्सितम् ॥ १२ ॥
अनुवाद
च्यवन मुनि बोले : हालाँकि तुम दोनों यज्ञ में सोमरस पीने के अधिकारी नहीं हो, किन्तु मैं वचन देता हूँ कि मैं तुम्हें सोमरस से भरा हुआ पूरा बर्तन दूँगा। कृपा करके मेरे लिए सौन्दर्य और युवावस्था का प्रबन्ध करो क्योंकि नवयौवना स्त्रियों को वे आकर्षक लगते हैं।
Chyavan Muni said: Although you both are not eligible to drink Somras in the yagya, I promise that I will give you a full vessel full of Somras. Please arrange for beauty and youth for me because young women find these attractive.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥