Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.3.1: श्री शुकदेव गोस्वामी जी आगे कहते हैं: हे राजन! मुनिवर शर्याति, जो मनु के पुत्र थे, वैदिक ज्ञान के धनी थे। उन्होंने अंगिरावंशियों द्वारा सम्पन्न किए जाने वाले यज्ञ के दूसरे दिन के आयोजनों के विषय में आदेश दिए। | bhagavat अध्याय 9.3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
शर्यातिर्मानवो राजा ब्रह्मिष्ठ: सम्बभूव ह ।
यो वा अङ्गिरसां सत्रे द्वितीयमहरूचिवान् ॥ १ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी जी आगे कहते हैं: हे राजन! मुनिवर शर्याति, जो मनु के पुत्र थे, वैदिक ज्ञान के धनी थे। उन्होंने अंगिरावंशियों द्वारा सम्पन्न किए जाने वाले यज्ञ के दूसरे दिन के आयोजनों के विषय में आदेश दिए।
Sri Sukadeva Goswami continued: O King, King Sharyati, the second son of Manu, was well versed in Vedic knowledge. He gave orders regarding the celebrations on the second day of the yajna performed by the Angira clan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥