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bhagavat 9.24.36: क्योंकि कुन्ती को लोगों की बुराई से डर था, इसलिए उसे बहुत दिक्कत से अपने बच्चे की ममता को त्यागना पड़ा। मजबूरी में उसने बच्चे को एक टोकरी में लादकर नदी के पानी के हवाले कर दिया। हे महाराज परीक्षित, बाद में तुम्हारे पवित्र और पराक्रमी बाबा पाण्डु ने कुन्ती से शादी कर ली।   |   bhagavat अध्याय 9.24: भगवान् श्रीकृष्ण   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 24: भगवान् श्रीकृष्ण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  9.24.36 
तं सात्यजन्नदीतोये कृच्छ्राल्लोकस्य बिभ्यती ।
प्रपितामहस्तामुवाह पाण्डुर्वै सत्यविक्रम: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि कुन्ती को लोगों की बुराई से डर था, इसलिए उसे बहुत दिक्कत से अपने बच्चे की ममता को त्यागना पड़ा। मजबूरी में उसने बच्चे को एक टोकरी में लादकर नदी के पानी के हवाले कर दिया। हे महाराज परीक्षित, बाद में तुम्हारे पवित्र और पराक्रमी बाबा पाण्डु ने कुन्ती से शादी कर ली।
 
Since Kunti was afraid of people's criticism, she had to give up her love for her son with great difficulty. Unwillingly, she locked the child in a basket and floated it in the river. O King Parikshit, later your pious and valiant father Pandu married Kunti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)