Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.24.33: जैसे ही कुन्ती ने सूर्यदेव को बुलाया, वे तुरन्त उसके सामने प्रकट हो गये। इससे वह हैरान रह गयी। उसने सूर्यदेव से कहा, "मैं तो सिर्फ़ योगशक्ति की जाँच कर रही थी। आप को अकारण बुलाया है, इसके लिए मुझे खेद है। कृपा करके वापस चले जाइये और मुझे क्षमा कर दीजिये।" | bhagavat अध्याय 9.24: भगवान् श्रीकृष्ण । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदैवोपागतं देवं वीक्ष्य विस्मितमानसा ।
प्रत्ययार्थं प्रयुक्ता मे याहि देव क्षमस्व मे ॥ ३३ ॥
अनुवाद
जैसे ही कुन्ती ने सूर्यदेव को बुलाया, वे तुरन्त उसके सामने प्रकट हो गये। इससे वह हैरान रह गयी। उसने सूर्यदेव से कहा, "मैं तो सिर्फ़ योगशक्ति की जाँच कर रही थी। आप को अकारण बुलाया है, इसके लिए मुझे खेद है। कृपा करके वापस चले जाइये और मुझे क्षमा कर दीजिये।"
As soon as Kunti invoked the Sun God, he immediately appeared before her. She was extremely surprised at this. She said to the Sun God, “I was just testing the effect of this yogic power. I am sorry that I called you in vain. Please go back and forgive me.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥