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bhagavat 9.24.14: सत्यक के पुत्र युयुधान थे, जिसके पुत्र जय थे। जय का एक पुत्र हुआ जिसका नाम कुणि था। कुणि के पुत्र युगंधर थे। अनमित्र के एक अन्य पुत्र वृष्णि थे।   |   bhagavat अध्याय 9.24: भगवान् श्रीकृष्ण   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 24: भगवान् श्रीकृष्ण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.24.14 
युयुधान: सात्यकिर्वै जयस्तस्य कुणिस्तत: ।
युगन्धरोऽनमित्रस्य वृष्णि: पुत्रोऽपरस्तत: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
सत्यक के पुत्र युयुधान थे, जिसके पुत्र जय थे। जय का एक पुत्र हुआ जिसका नाम कुणि था। कुणि के पुत्र युगंधर थे। अनमित्र के एक अन्य पुत्र वृष्णि थे।
 
Satyak's son was Yuyudhan whose son was Jai. Jai had a son named Kuni. Kuni's son was Yugandhar. Anamitra's second son was Vrishni.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)