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bhagavat 9.24.10-11: "यह निश्चय हुआ कि मनुष्यों में बभ्रु श्रेष्ठ हैं और देवावृध देवताओं के समकक्ष हैं। बभ्रु और देवावृध की संगति ने उनके सभी वंशजों, जिनकी संख्या 14,065 थी, को मोक्ष प्रदान किया। इसी कुल में राजा महाभोज और उनके बाद भोज राजा हुए।"   |   bhagavat अध्याय 9.24: भगवान् श्रीकृष्ण   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 24: भगवान् श्रीकृष्ण  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  9.24.10-11 
बभ्रु: श्रेष्ठो मनुष्याणां देवैर्देवावृध: सम: ।
पुरुषा: पञ्चषष्टिश्च षट् सहस्राणि चाष्ट च ॥ १० ॥
येऽमृतत्त्वमनुप्राप्ता बभ्रोर्देवावृधादपि ।
महाभोजोऽतिधर्मात्मा भोजा आसंस्तदन्वये ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
"यह निश्चय हुआ कि मनुष्यों में बभ्रु श्रेष्ठ हैं और देवावृध देवताओं के समकक्ष हैं। बभ्रु और देवावृध की संगति ने उनके सभी वंशजों, जिनकी संख्या 14,065 थी, को मोक्ष प्रदान किया। इसी कुल में राजा महाभोज और उनके बाद भोज राजा हुए।"
 
“It was decided that Babhru is the best among humans and Devavridh is like a god. Due to the association of Babhru and Devavridh, all their descendants, whose number was 14065, attained salvation.” King Mahabhoj was very pious and Bhoj became the king in his clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)